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HRA छूट कैलकुलेटर

जानें कि आपके मकान किराया भत्ते का कितना हिस्सा टैक्स-फ़्री है।

50% सीमा इन शहरों में: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद।

रक़में हैं
₹

₹50,000 (50 हज़ार) · DA तभी जोड़ें जब वह रिटायरमेंट लाभ में गिना जाता हो

₹

₹20,000 (20 हज़ार)

₹

₹18,000 (18 हज़ार)

टैक्स-फ़्री HRA (पुरानी रिजीम)

₹1,56,000 सालाना

₹13,000 महीना · कर योग्य HRA ₹84,000 सालाना

छूट इन तीनों में से सबसे कम रक़म होती है

असल में मिला HRA
₹2,40,000
✓ दिया गया किराया − बेसिक + DA का 10%
₹1,56,000
बेसिक + DA का 40% (दूसरा शहर)
₹2,40,000

धारा 10(13A) के नियम, आयकर नियम 2026 की शहर सूची के साथ (7 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए)। HRA छूट सिर्फ़ पुरानी टैक्स रिजीम में मिलती है। रिजीम की तुलना के लिए नतीजा इनकम टैक्स कैलकुलेटर में डालें।

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HRA छूट कैसे निकालें

  1. 1

    वर्ष और जिस शहर में रहते हैं, चुनें।

  2. 2

    साल भर का या हर महीने का बेसिक वेतन + DA, मिलने वाला HRA और दिया जाने वाला किराया डालें।

  3. 3

    छूट वाला और कर योग्य HRA देखें, उन तीन सीमाओं के साथ जिनकी क़ानून तुलना करता है।

HRA छूट कैसे काम करती है

अगर आप किराये के घर में रहते हैं और मकान किराया भत्ता मिलता है, तो पुरानी रिजीम में धारा 10(13A) के तहत उसका कुछ हिस्सा टैक्स-फ़्री है। छूट इन तीनों में से सबसे कम रक़म होती है:

मकान किराया भत्ता कैलकुलेटर, HRA छूट 2026-27 के लिए अपडेटेड।

  1. असल में मिला HRA।
  2. दिया गया किराया − बेसिक वेतन + DA का 10%।
  3. सूची वाले शहरों में बेसिक + DA का 50%, बाक़ी जगह 40%।

कैलकुलेटर तीनों दिखाता है और लागू होने वाली पर ✓ लगाता है, ताकि आप देख सकें कि आपकी छूट किस वजह से सीमित है। अक्सर थोड़ा ज़्यादा किराया या बेसिक वेतन में बदलाव सबसे कम सीमा को बदल देता है।

2026-27 से आठ शहर

वित्त वर्ष 2025-26 तक 50% सीमा सिर्फ़ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में थी। टैक्स वर्ष 2026-27 से लागू आयकर नियम 2026 बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को जोड़ते हैं। अगर आप इन चार में से किसी शहर में रहते हैं, तो वर्ष बदलकर फ़र्क़ देखें: आपका टैक्स-फ़्री HRA काफ़ी बढ़ सकता है।

मासिक या सालाना आँकड़े

रक़में हर महीने की (जैसे सैलरी स्लिप पर) या सालाना डालें। अगर साल के बीच किराया या वेतन बदला, तो सबसे सटीक नतीजे के लिए सालाना जोड़ डालें, क्योंकि क़ानून सीमाएँ उसी अवधि पर लगाता है जिसमें आपने किराया दिया।

सुझाव

  • किराया रसीदें रखें। किराया साल में ₹1 लाख से ज़्यादा हो तो नियोक्ता को मकान मालिक का PAN चाहिए। किराया रसीद जनरेटर प्रिंट होने वाली रसीदें बनाता है।
  • अगर घर माता-पिता के नाम है और वे किराये को अपनी आय में दिखाते हैं, तो उन्हें किराया देना मान्य है।
  • नई रिजीम में HRA क्लेम नहीं होता। कौन-सी रिजीम बेहतर है, देखने के लिए छूट की रक़म इनकम टैक्स कैलकुलेटर में डालें।

नियम 7 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए। यह योजना और घोषणा के लिए अनुमान है, टैक्स सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

HRA छूट कैसे निकाली जाती है?

छूट तीन में से सबसे कम रक़म होती है: असल में मिला HRA, दिया गया किराया − बेसिक + DA का 10%, और सूची वाले शहरों में बेसिक + DA का 50% (बाक़ी जगह 40%)। बाक़ी HRA कर योग्य है।

किन शहरों को 50% सीमा मिलती है?

वित्त वर्ष 2025-26 तक सिर्फ़ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई। टैक्स वर्ष 2026-27 से आयकर नियम 2026 बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को जोड़ते हैं, कुल आठ शहर।

क्या नई रिजीम में HRA क्लेम कर सकते हैं?

नहीं। HRA छूट सिर्फ़ पुरानी रिजीम में मिलती है। नई रिजीम में पूरा HRA कर योग्य है।

क्या मकान मालिक का PAN चाहिए?

अगर किराया साल में ₹1 लाख से ज़्यादा है तो नियोक्ता मकान मालिक का PAN माँगेगा। सबूत के तौर पर किराया रसीदें रखें।