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CTC से इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर

ऑफ़र लेटर का CTC असल में हर महीने कितना देगा।

₹

₹12,00,000 (12 लाख)

%

आम तौर पर 40–50%। ऑफ़र लेटर या सैलरी स्लिप देखें

₹

इंश्योरेंस, मील कार्ड जैसे लाभ जो वेतन के रूप में नहीं मिलते

₹

₹2,500 (2.5 हज़ार) · जिन राज्यों में लगता है वहाँ ज़्यादातर ₹2,500; आपके राज्य में न लगे तो 0 डालें

टैक्स रिजीम

हाथ में आने वाला वेतन (मासिक)

₹85,388

₹10,24,654 सालाना · नई रिजीम

CTC
₹12,00,000
− नियोक्ता का PF
₹72,000
− ग्रेच्युटी (बेसिक का 4.81%)
₹28,846
सकल वेतन
₹10,99,154
− कर्मचारी का PF
₹72,000
− प्रोफ़ेशनल टैक्स
₹2,500
− इनकम टैक्स (नई रिजीम)
₹0
हाथ में आने वाला वेतन (सालाना)
₹10,24,654
  • हाथ में: 85.4%
  • इनकम टैक्स: 0.0%
  • PF और अन्य: 14.6%

दूसरी रिजीम की तुलना में नई रिजीम में आपकी साल में ₹1,11,730 की बचत होती है।

चुने गए वर्ष के इनकम टैक्स स्लैब, 87A छूट और स्टैंडर्ड डिडक्शन इस्तेमाल होते हैं; पुरानी रिजीम में आपका PF 80C में गिना जाता है। HRA जैसे भत्ते और 80D जैसी कटौतियाँ शामिल नहीं हैं; उनके लिए इनकम टैक्स कैलकुलेटर इस्तेमाल करें। यह अनुमान है, टैक्स सलाह नहीं।

आपके ब्राउज़र में प्रोसेस होता है। कुछ भी अपलोड नहीं होता।

CTC से इन-हैंड सैलरी कैसे निकालें

  1. 1

    ऑफ़र लेटर वाला CTC डालें।

  2. 2

    बेसिक वेतन का हिस्सा, PF और ग्रेच्युटी CTC में है या नहीं, सेट करें।

  3. 3

    CTC में शामिल इंश्योरेंस जैसे लाभ जोड़ें।

  4. 4

    सकल वेतन, हर कटौती और मासिक इन-हैंड सैलरी देखें।

CTC पूरा हाथ में क्यों नहीं आता

CTC, यानी कॉस्ट टू कंपनी, वह सब है जो नियोक्ता साल भर में आप पर ख़र्च करता है। इसका एक हिस्सा कभी मासिक सैलरी के रूप में नहीं मिलता: नियोक्ता का PF योगदान, बाद के लिए अलग रखी ग्रेच्युटी, और ग्रुप इंश्योरेंस या मील कार्ड जैसे लाभ। फिर बची रक़म से आपका PF, प्रोफ़ेशनल टैक्स और इनकम टैक्स कटता है। इसीलिए ₹12 लाख CTC का मतलब शायद ही कभी ₹1 लाख महीना हाथ में होता है।

CTC कैलकुलेटर और सैलरी ब्रेकअप कैलकुलेटर: CTC को इन-हैंड सैलरी में बदलें और पूरी तस्वीर देखें।

कैलकुलेटर इसे कैसे तोड़ता है

  1. बेसिक सैलरी: CTC का एक हिस्सा, आम तौर पर 40–50%। ज़्यादातर दूसरे हिस्से इसी पर टिके हैं।
  2. नियोक्ता PF: बेसिक का 12%, पूरे बेसिक पर या ₹15,000 की वेतन सीमा तक।
  3. ग्रेच्युटी: अगर CTC में शामिल है तो बेसिक का 4.81%। यह पाँच साल की सेवा के बाद ही मिलती है।
  4. दूसरे लाभ: इंश्योरेंस प्रीमियम जैसी चीज़ें जो CTC में हैं पर सैलरी में नहीं मिलतीं।
  5. सकल वेतन वह है जो बचता है; उसमें से कैलकुलेटर आपका PF, प्रोफ़ेशनल टैक्स और इनकम टैक्स घटाता है।

उदाहरण

₹15 लाख CTC, 50% बेसिक और पूरे बेसिक पर PF: नियोक्ता PF ₹90,000, ग्रेच्युटी लगभग ₹36,058, सकल वेतन लगभग ₹13.74 लाख। कर्मचारी PF ₹90,000, प्रोफ़ेशनल टैक्स ₹2,500 और नई रिजीम में ₹77,830 इनकम टैक्स के बाद इन-हैंड सैलरी लगभग ₹12.04 लाख साल, यानी क़रीब ₹1,00,300 महीना।

नौकरी के ऑफ़र की तुलना

एक जैसे CTC वाले दो ऑफ़र हर महीने काफ़ी अलग रक़म दे सकते हैं। ज़्यादा बेसिक का मतलब ज़्यादा PF और ग्रेच्युटी (बचत के लिए अच्छा, पर हर महीने कम नक़द), और CTC के अंदर के लाभ सैलरी घटाते हैं। दोनों ऑफ़र कैलकुलेटर में डालें और इन-हैंड आँकड़े की तुलना करें, फिर पूरा टैक्स इनकम टैक्स कैलकुलेटर में देखें। बढ़ोतरी मिली है? सैलरी हाइक कैलकुलेटर आज़माएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेरी इन-हैंड सैलरी CTC से इतनी कम क्यों है?

CTC में वह पैसा भी शामिल है जो हर महीने नहीं मिलता: नियोक्ता का PF, ग्रेच्युटी और इंश्योरेंस जैसे लाभ। फिर सकल वेतन से आपका PF, प्रोफ़ेशनल टैक्स और इनकम टैक्स कटता है।

CTC और सकल वेतन में क्या फ़र्क़ है?

सकल वेतन = CTC − नियोक्ता का PF − ग्रेच्युटी − ग़ैर-नक़द लाभ। यह कटौती से पहले सैलरी स्लिप के सभी हिस्सों का जोड़ है।

CTC में ग्रेच्युटी कैसे गिनी जाती है?

कई कंपनियाँ बेसिक का 4.81% अलग रखती हैं (हर साल के 15 दिन ÷ 26 कामकाजी दिन ÷ 12 महीने)। यह कम से कम 5 साल की सेवा के बाद नौकरी छोड़ने पर ही मिलती है।

क्या नतीजा सटीक है?

यह क़रीबी अनुमान है। आपकी सैलरी स्लिप में वेरिएबल पे, मील कार्ड, NPS, HRA छूट या दूसरी चीज़ें हो सकती हैं जो अंतिम आँकड़ा बदलती हैं।