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EMI कैसे निकलती है (और ब्याज कैसे कम करें)

आपकी EMI एक तय फ़ॉर्मूले से निकलती है। इसे समझ लें तो बजट में फ़िट होने वाली अवधि चुन सकते हैं और ब्याज में लाखों बचा सकते हैं।

3 मिनट में पढ़ें

EMI कैलकुलेटर (लोन कैलकुलेटर) खोलें

बैंक कौन-सा फ़ॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं

भारत में लगभग हर बैंक घटते बैलेंस (रिड्यूसिंग बैलेंस) का तरीक़ा अपनाता है। हर महीने ब्याज सिर्फ़ बाक़ी रक़म पर लगता है, और EMI पूरी अवधि एक जैसी रहती है:

EMI = P × r × (1 + r)ⁿ ÷ ((1 + r)ⁿ − 1)

  • P = लोन की रक़म
  • r = मासिक ब्याज दर = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100
  • n = मासिक किस्तों की संख्या

इसे हाथ से निकालने की ज़रूरत नहीं: EMI कैलकुलेटर तुरंत निकालकर साल-दर-साल का ब्योरा दिखाता है।

एक उदाहरण

8.5% पर 20 साल के लिए ₹30 लाख का होम लोन:

  • r = 8.5 ÷ 12 ÷ 100 = 0.00708
  • n = 20 × 12 = 240
  • EMI ≈ ₹26,035 महीना
  • कुल भुगतान ≈ ₹62.5 लाख, जिसमें ब्याज ≈ ₹32.5 लाख

आप लोन की रक़म से ज़्यादा ब्याज देते हैं। लंबे लोन में ऐसा आम है, और इसीलिए अवधि और प्रीपेमेंट इतने मायने रखते हैं।

आपकी EMI कहाँ जाती है

शुरुआती सालों में हर EMI का ज़्यादातर हिस्सा ब्याज होता है। ऊपर वाले लोन के पहले साल में ₹3.1 लाख की EMI में से लगभग ₹2.5 लाख ब्याज में जाता है और सिर्फ़ लगभग ₹60,000 लोन घटाता है। आख़िरी सालों में लगभग पूरी EMI मूलधन घटाती है। कैलकुलेटर का ब्योरा यह साल-दर-साल दिखाता है।

अवधि से क्या बदलता है

अवधि EMI कुल ब्याज
15 साल ₹29,542 ₹23.2 लाख
20 साल ₹26,035 ₹32.5 लाख
25 साल ₹24,157 ₹42.5 लाख

20 से 25 साल करने पर EMI ₹2,000 से भी कम घटती है, पर ब्याज लगभग ₹10 लाख बढ़ जाता है।

दर से क्या बदलता है

सिर्फ़ 0.5% बढ़ने से भी फ़र्क़ पड़ता है: वही ₹30 लाख 20 साल के लिए 9% पर लें तो EMI ₹26,992 और ब्याज लगभग ₹34.8 लाख, यानी 8.5% से लगभग ₹2.3 लाख ज़्यादा। ऑफ़र ध्यान से मिलाएँ, और अगर आपकी दर ज़्यादा है तो बैंक से मौजूदा दर पर लाने को कहें।

कम ब्याज देने के तीन तरीक़े

  1. जितनी कम अवधि आराम से चला सकें, वही चुनें। EMI को हाथ में आने वाली सैलरी के लगभग 40% के भीतर रखें; अपनी सैलरी टैक्स के बाद सैलरी कैलकुलेटर से देखें।
  2. जल्दी प्रीपेमेंट करें। उदाहरण में, पहले साल के बाद ₹1 लाख का एक अतिरिक्त भुगतान (EMI वही रखकर) लोन लगभग 18 महीने पहले ख़त्म कर देता है। ज़्यादातर बैंक फ़्लोटिंग रेट होम लोन के प्रीपेमेंट पर शुल्क नहीं लेते।
  3. सैलरी के साथ EMI बढ़ाएँ। हर साल EMI 5% बढ़ाने से 20 साल का लोन काफ़ी छोटा हो जाता है।

लोन लेने से पहले

घर का बजट कैलकुलेटर से देखें कि आपको कितना लोन मिल सकता है; यह आय और डाउन पेमेंट पर बैंकों वाली सीमाएँ लगाता है। अतिरिक्त ख़र्च भी याद रखें: प्रोसेसिंग फ़ीस, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन, बीमा और इंटीरियर।

यहाँ के आँकड़े समझाने के लिए हैं; सही दर, फ़ीस और ब्योरा आपके बैंक के ऑफ़र लेटर में होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

EMI का फ़ॉर्मूला क्या है?

EMI = P × r × (1 + r)^n ÷ ((1 + r)^n − 1), जहाँ P लोन की रक़म, r मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100) और n मासिक किस्तों की संख्या है।

क्या लंबी अवधि बेहतर है?

इससे EMI घटती है पर कुल ब्याज बहुत बढ़ता है। 8.5% पर ₹30 लाख के लोन पर 15 साल में लगभग ₹23 लाख और 25 साल में लगभग ₹42 लाख ब्याज लगता है।

क्या प्रीपेमेंट से फ़ायदा होता है?

हाँ, ख़ासकर शुरुआती सालों में जब हर EMI का ज़्यादातर हिस्सा ब्याज होता है। पहले साल के बाद सिर्फ़ ₹1 लाख का एक अतिरिक्त भुगतान 20 साल के होम लोन को लगभग 18 महीने छोटा कर सकता है।

मेरे बैंक की EMI थोड़ी अलग क्यों है?

बैंक अलग तरह से राउंड करते हैं या पहली किस्त से पहले के दिनों का प्री-EMI ब्याज लेते हैं। फ़र्क़ आम तौर पर कुछ रुपये का होता है।

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